जय झारखंड, जय आदिवासी, जय हिंद– मरांग गोमके
मुंडाओ ने हमेशा से ‘दिकुओ’ को चुनौती दी है। ब्रितानी हुकूमत के विरुद्ध बिरसा मुंडा के उलगुलान की विरासत को आगे बढ़ाते है –मरांग गोमके जयपाल मुंडा। 1927 में बने पहले आदिवासी आईसीएस अधिकारी 1928 में भारत के हॉकी कैप्टन बन जाते है। हमेशा जितने वाला यह आदिवासी भारत के लिए गोल्ड मेडल लेकर आता