जय झारखंड, जय आदिवासी, जय हिंद– मरांग गोमके

मुंडाओ ने हमेशा से ‘दिकुओ’ को चुनौती दी है। ब्रितानी हुकूमत के विरुद्ध बिरसा मुंडा के उलगुलान की विरासत को आगे बढ़ाते है –मरांग गोमके जयपाल मुंडा। 1927 में बने पहले आदिवासी आईसीएस अधिकारी 1928 में भारत के हॉकी कैप्टन बन जाते है। हमेशा जितने वाला यह आदिवासी भारत के लिए गोल्ड मेडल लेकर आता

गुरुदेव की धरती–”आमार सोनार बांग्ला”

उत्तर में हिमालय और दक्षिण में हिंद महासागर के बीच आती है देश के संस्कृति की सबसे अच्छी रक्षक ज़मीन ‘बंगाल’। बंगाल की अपनी एक संस्कृति रही है, बंगाल ने हमेशा उसकी रक्षा की है। सबसे अच्छी खूबी यह है कि बंगाल ने हमेशा सुधारो का स्वागत किया है जब सारे हिन्दू धर्म में रूढ़िवाद